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जीवन का practical स्वरूप

 हम बड़ी position वालों का शरण लेते हैं,यह हम कहते है जब हमारे सत्य को भय हो,हम अनुभवी न हो,लायक न हो।  हम खुद ही बड़े बने और बड़े कर्तव्य करें साहस तो हर बात का जीवन का practical स्वरूप समझ में आए ।

सत्य शेर के समान है।

आज की दुनिया में  जहां झूठ साबित करने  के लिए  ्बा्तों को घुमाया फिराया जाता है जो सच की ‌रती भी न दिखे,पर सत्य कभी छिप नहीं सकता वह खुद प्रत्यक्ष होता है, उसे सिद्ध करने की ज़रुरत नहीं,कोई उसे सामने आने से रोक नहीं सकता। जहां सत्य वहां भगवान है । जहां भगवान है वहां जीत है। सत्य शेर के समान है। In today's world, where lies are twisted to prove a lie that does not even look like the truth, but the truth can never be hidden, it is self-evident, there is no need to prove it, no one can stop it from coming out. Where there is truth, there is God. Where there is God, there is victory. Truth is like a lion.

कलियुग यानी झूठ,धोखे,छल,कपट का बोलबाला

कलियुग यानी झूठ,धोखे,छल,कपट का बोलबाला। जहां कौड़ियों के दाम पर लोग अपना ईमान बेचते हैं। जहां इंसान का ज़मीर सोया रहता है। जहां धर्म और सच्चाई केवल मुट्ठी भर लोगों में बचता है और कोई सच बोलने का साहस करें तो उसे डराया जाता है, तुम्हें यहां रहना है कि नहीं? तुम हमारे ऊपर मुसीबत लाओगे। हमें यहां समाज में रहना है जैसे कि धर्म और सच्चाई की बातें कोई दूसरी दुनिया की हो। जबकि यह तो जीवन का अभिन्न हिस्सा है, natural जीवन जीने का तरीका है। जहां सत्य है वहां भगवान है। जैसे अत्याचार करना अपराध है, वैसे अत्याचार सहना भी अपराध है। जो सत्य का साथ देते हैं, परमात्मा हजार भुजाओं से उनका साथ देने किसी न किसी रूप में पहुंच ही जाता है और उनकी हमेशा रक्षा होती है। अब हमें तय करना है हम किसका साथ दे। Kaliyuga means the predominance of falsehood, deception, deception, and deceit. Where people sell their faith at the price of coins. Where the human soul sleeps. Where religion and truth survive only in a handful of people and if anyone dares to speak the truth, he is intimidated, do you have to stay here or ...

आज का मानव और उसका जीवन.

 आज का मानव और उसका जीवन. डर और control के आधार पर,दमन के आधार पर जीवन । कोई कहे रहम करो। हमारी सुनो। हमारी आय बढ़ाओं। वो कहते काम ज्यादा करो। वो कहते हमें पर्याप्त परक्षिशण दो। ऐसे मनुष्य क्या करें? एक ही उपाय है,जब दोनों एक दूसरे की समझे। एक दूसरे का मूल्य रख पाए। कि आपके बिना हम अधूरे हैं,और हमारे बिना आप।